किन सज़ाओं तक मुझे मेरी ख़ता ले जायेगी।
मुझको आखिर दूर तक कितनी वफा ले जायेगी।
मुझको अपने रास्ते का इल्म है अच्छी तरह
क्यों कहीं मुझको कोई पागल हवा ले जायेगी।
तमतमा उठ्ठेगा जब सूरज, तो पानी, दोस्तों
प्यास के मारों तलक काली घटा ले जायेगी।
मैं तो अपनी कोशिशों से जाऊँगा जंगल के पार
अपको उस पार क्या कोई दुआ ले जायेगी।
ज़िंदगी जब-जब भी आयेगी मेरी दहलीज़ पर
माँग कर मुझसे वो थोड़ा हौसला ले जायेगी।
‘नुर’ इस अल्हड़ पवन को इस तरह से साध तू
दूर तक दुनिया में वो तेरा कहा ले जायेगी।
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3 comments:
उम्दा ! बेहतरीन!
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लिए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com
हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
टेम्पलेट अच्छा चुना है
कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें
कृपया मेरा भी ब्लाग देखे और टिप्पणी दे
http://www.ucohindi.co.nr
आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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